About Me

My photo
हर जगह ये पूछा जाता है कि अपने बारे मे बताइए (About me), हम ये सोचते है की जो हमें जानते है उन्हें अपने बारे मे बताना ग़लत होगा क्योंकि वो हमें जानते है और जो हमें नही जानते उन्हे हम बता कर क्या करेंगे की हम कौन है | जो हमें नही जानता क्या वो वाकई हमें जानना चाहता है और अगर जानना चाहता है तो उसे About me से हम क्या बताये क्योंकि हम समझते है बातचीत और मिलते रहने से आप एक दूसरे को बेहतर समझ सकते हो About Me से नही | वैसे एक बात और है हम अपने बारे मे बता भी नही सकते है क्योंकि हमें खुद नही पता की हम क्या है ? हम आज भी अपने आप की तलाश कर रहे है और आज तक ये नही जान पायें हैं की हम क्या है? अब तक का जीवन तो ये जानने मे ही बीत गया है की हमारे आस पास कौन अपना है और कौन पराया ? ये जीवन एक प्रश्न सा ज़रूर लगता है और इस प्रश्न को सुलझाने मे हम कभी ये नही सोच पाते है की हम कौन है? कुछ बातें सीखने को भी मिली जैसे आपका वजूद आपके स्वभाव या चरित्र से नही बल्कि आपके पास कितने पैसे है उससे निर्धारित होता है | कुछ लोग मिले जो कहते थे की वो रिश्तों को ज़्यादा अहमियत देते है लेकिन अंतत: ... बहुत कुछ है मन मे लिखने के लिए लेकिन कुछ बातें या यू कहें कुछ यादें आ जाती है और मन खट्टा कर जाती है तो कुछ लिख नही पाते हैं |

Followers

Powered by Blogger.
Showing posts with label The secret to a happy life. Show all posts
Showing posts with label The secret to a happy life. Show all posts
Wednesday, November 16, 2011

अनोखा प्राणायाम

आमतौर पर आपने सुना होगा कि प्राणयाम सुबह जल्दी उठ कर किया जाना चाहिए लेकिन हम आपको ऐसे प्राणायाम के बारे मेंबता रहे हैं जो आधी रात में करना चाहिए।
ये पढ़ कर आपको आश्र्चय तो होगा कि क्या ये  सच है? जी हां ये सच है। हम आपको रात में होने वाले ऐसे प्राणायाम के बारें में बता रहे हैं जिससे आपको आसानी से जादूई ताकत मिल सकती है और आपको भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही पता चल जाएगा। योगसूत्रों के अनुसार प्राणायाम मन को शांत रखने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। साथ ही इससे किसी भी कार्य को करने की एकाग्रता बढ़ती है।
भ्रामरी प्राणायाम एक ऐसा  प्राणयाम है जिसे आप सिर्फ रात को ही कर सकते हैं। इसके रोजाना करने  से दिमाग में ऐसे न्यूरोंस एक्टीव हो जाते हैं जिससे आपको भविष्य में होने वाली अच्छी और बुरी घटनाओं का पहले ही पुता चल जाता हेै।

कैसे करें ये चमत्कारी प्राणायाम की विधि
योगियों के अनुसार यह प्राणायाम रात्रि के समय किया जाना चाहिए। जब आधी रात बीत जाए और किसी भी जीव-जंतु की कोई आवाज सुनाई ना दे। उस समय किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठकर दोनों हाथों की उंगलियों को दोनों कानों में लगाकर सांस अंदर खींचे और कुंभक द्वारा सांस को रोकें।  इसमें कान बंद होने पर भौरों के समान शब्द सुनाई देने लगता है। यह शब्द दाएं कान में अनुभव होता है।

क्या चमत्कार होता है इस प्राणायाम से
योगियों के अनुसार इस आसन से मन की चंचलता आपका दिमाग भटकता बंद हो जाता है। सिर के बीच में होने वाले सहस्त्रार चक्र पर कंपन होती है। इससे भविष्य में होने वाली घटनाओं का आसानी से पता चल जाता है। अगर  कुछ अच्छा या बुरा होने वाला है तो पहले ही पता चल जाता है। लगातार ये प्राणायाम करने से तनाव दूर होता है और दैवीय शक्ति मिलती है।
Wednesday, November 9, 2011

कपड़े पहनते समय सिक्के गिरे तो होगा कुछ अच्छा...

काफी लोगों के साथ ऐसा होता है कि कहीं जाते वक्त या कपड़े पहनते समय पैसे गिर जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार इसे शकुन माना जाता है और निकट भविष्य में इसके शुभ फल प्राप्त होते हैं।
शकुन और अपशकुन को ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने से पहले कुछ ना कुछ शकुन या अपशकुन अवश्य होते हैं उन्हें समझना पड़ता है। इन्हीं छोटी-छोटी घटनाओं में कार्य की सफलता या असफलता के संकेत छुपे होते हैं। आजकल ऐसी बातों को अंधविश्वास भी माना जाता है लेकिन ज्योतिष एक विज्ञान ही है और इसके अनुसार ऐसी घटनाओं का संबंध हमारे भविष्य से जुड़ा होता है।
अगर आप कहीं जा रहे हैं या आप कपड़े पहन रहे हैं और जेब से पैसे गिरें तो इसे शुभ संकेत मानना चाहिए। ऐसा होने पर निकट भविष्य में आपको धन प्राप्ति के योग बनते हैं। इसी प्रकार यदि किसी लेन-देन के समय आपके हाथ से पैसा छूट जाए तो भी इसे शुभ माना जाता है। साथ ही यदि कपड़े बदलते वक्त भी ऐसा हो तो शुभ होता है। इन घटनाओं का फल कितने समय में मिलेगा इसका कोई निश्चित दिन नहीं है लेकिन शुभ फल अवश्य ही प्राप्त होता है।
Tuesday, November 8, 2011

अगर पैसा डबल करना है तो पैसे मिलते ही घर में इस जगह रखें

ये पढ़ कर आप भी आश्चर्य चकित जरूर हो जाएंगे क्योंकि आपको ये नहीं पता कि आपके ही घर का एक कोना ऐसा है जो आपकी सैलेरी, बिजनेस फायदा या कहीं से भी मिले पैसे डबल कर देता है।

अगर आप अपना पैसा डबल करना चाहते हैं तो ये अब आसानी से हो सकता है। इसके लिए आपको बस अपनी सैलेरी या बिजनेस फायदे पर ध्यान देना होगा। जब भी आपको बिजनेस में फायदा हो या आपकी सैलेरी आए तब आप उन पैसों को सीधे अपने घर लेकर आ जाएं। आपके ही घर में एक कोना ऐसा भी है जो पैसे डबल करने का काम करता है। ये कोना ऐसी दिशा में है जिसमें आपका पैसा डबल हो जाएगा। जानिए कैसे

जैसे ही आपको पैसा मिले आप अपने घर में पूर्व-उत्तर के बीच ईशान्य कोण में पूजा के  स्थान या मंदिर में रख दें अगर पूजा का स्थान या मंदिर नहीं होतो उस जगह एक पूजा का बाजोट रख कर उस पर पीला कपड़ा बिछा दें। उस कपड़े पर पीले चावल, केसर और लक्ष्मी जी कि मूर्ति रखें। अपने पैसे भी उसी बाजोट पर रख दें। फिर लक्ष्मी जी को दीपक लगा दें और रात भर पैसे वहीं रहने दें। अगले दिन तिजोरी में वो पैसे रख दें। कुछ ही दिनों में आपको उन पैसो से दुगना फायदा मिलेगा।

पीले कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए सोना

सामान्यत: सोना काफी लोगों के घर अवश्य ही रहता है। आज सबसे बहुमूल्य धातु में सोना सबसे जरूरी धातु है। महिलाओं के श्रंगार में सोना सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अत: महिलाओं के आभूषण रखने के लिए घर में विशेष स्थान होता है। शास्त्रों के अनुसार घर में सोना कैसे रखा जाना चाहिए इस संबंध में एक खास बात बताई गई है।

सोना एक ऐसी धातु है तो पहनने वाले के व्यक्तित्व को निखार देती है। इसे धारण करने से व्यक्तित्व आकर्षक और मनोहारी हो जाता है। ज्योतिष के अनुसार सोने का संबंध में ग्रह बृहस्पति से भी है। जिस व्यक्ति के जितना अधिक स्वर्ण होता है वह उतना ही धनी होता है। प्राचीन काल से स्वर्ण को सर्वाधिक महत्व दिया गया है, क्योंकि यह तब से ही सर्वाधिक मूल्यवान धातु है। इसे घर में रखने से महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

घर में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है कि महालक्ष्मी की कृपा परिवार में बनी रहे। देवी की कृपा प्राप्त करने का एक उपाय यह भी है कि हमारे घर में जो भी स्वर्ण है उसे पीले कपड़े में बांधकर रखा जाना चाहिए। इससे देवी की कृपा जो प्राप्त होती ही है। साथ में देव गुरु बृहस्पति की भी प्रसन्नता बनी रहती है। यदि कुंडली में बृहस्पति से संबंधित कोई दोष हो तो यह उपाय फायदेमंद रहता है।
Tuesday, November 1, 2011

अगर आप पैसों की कमी से परेशान हैं तो यह टोटका करें

जीवन निर्वाह के लिए पैसों की अहमियत उतनी ही होती है जितनी जिंदा रहने के लिए सांस लेने की। जैसे बिना सांस लिए जीना संभव नहीं है उसी तरह धन के अभाव में जीवन निर्वाह करना किसी सजा से कम नहीं है। इंसान की जिंदगी में कई बार ऐसा समय आता है जब उसे पैसों की तंगी घेर लेती है। यदि आप भी पैसे की कमी से परेशान हैं तो नीचे लिखा टोटका शुक्ल पक्ष के किसी शुक्रवार को करें।

टोटका

सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर उत्तर दिशा में मुंह रख कर बैठें। सामने बाजोट(पटिया) रखें व उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। अब बाजोट पर गेहूं की ढेरी बनाएं और उस पर 7 गोमती चक्र स्थापित करें। अब उस पर कुंकुम का तिलक करें और हर चक्र पर एक-एक सिक्का अर्पित करें। अब फूल चढ़ाकर धूप-दीप करें और फल अर्पित करें। अब नीचे लिखे मंत्र की 7 माला जप करें।

मंत्र- ऊँ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:

हर माला जप की समाप्ति पर हर चक्र पर एक फूल अर्पित करें। दूसरे दिन यह सभी सामग्री ले जाकर किसी सुनसान स्थान पर रख आएं। आपके जीवन से धन संबंधी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा।
Thursday, October 27, 2011

इस डेढ़ घंटे में तिजोरी न खोलें

हर दिन एक टाइम ऐसा होता है जो आपके पैसों के लिए खतरनाक हो सकता है। ये खतरनाक समय डेढ़ घंटे का होता है अगर आपने अपनी तिजोरी इस डेढ़ घंटे में खोल ली यानी तिजोरी में से पैसे निकाले या रखें तो समझ लें धीरे-धीरे आपका पैसा खत्म होने लगेगा और खर्च बढऩे लगेंगे। हो सकता है इस समय में लक्ष्मी आपकी तिजोरी से निकल जाए इसलिए सावधान रहें और जान लें कौन से डेढ़ घंटे आपके पैसों के लिए हो सकते हैं खतरनाक...
जानें किस दिन कौन से डेढ़ घंटे

सोमवार- सुबह 7:30 से 9:00

मंगलवार- दोपहर 03 से 04:30

बुधवार- दोपहर 12 से 01:30

गुरुवार- दोपहर 01:30 से 03:00

शुक्रवार- सुबह 10:30 से 12:00

शनिवार- सुबह 09:00 से 10:30

रविवार- शाम 04:30 से 06:00

गोल्डन पिरियड के इशारे

अगर आपकी किस्मत बदलने वाली है और पैसों का छप्पर फटने वाला है तो उससे पहले आपको कुछ इशारे मिलेंगे जिनसे आप पहले ही समझ जाएंगे कि आपका गोल्डन पिरियड आने वाला है जानिए वो कैसे इशारे हैं।
- अगर आप सपने में इन्द्र धनुष देखते हैं तो समझें आपके जीवन का बहुत सुखमय और खुशियों भरा समय शुरु होने वाला है।
- अगर सपने में कलश, शंख और सोने के गहने दिखे तो आपको जीवन में हर सुख मिलने वाला है।
- ये भी एक इशारा है अच्छे समय का, अगर सपने में खुद को चाय या चाय की चुस्की लेते देखें तो समझें आपके जीवन में हर्ष उल्लास और समृद्धि आने वाली है।
- जब कोई अपनी खोई हुई वस्तु प्राप्त करता है तो उसे आगामी जीवन में सुख मिलता है।
- अगर कोई व्यक्ति सपने में तिल, चावल सरसों, जौ, अन्न, का ढेर देखता है तो उस व्यक्ति को जीवन में सभी सुख मिलते हैं।

पर्स में रखें ये अनोखी चीजें

अगर आप चाहते हैं कि आप पर हमेशा लक्ष्मी मेहरबान रहे तो अपने पर्स में कुछ अनोखी चीजें रखें । इनको रखने से पूरे साल आप पर पैसों की बरसात होगी और कभी पैसों की तंगी नहीं झेलना पड़ेगी।



- इस दिवाली पर अपने पर्स में एक लाल रंग का लिफाफा रखें। इसमें आप अपनी कोई भी मनोकामना एक कागज में लिख कर रखें। इससे वह शीघ्र पूरी होगी।



- अगर पर्स में चांदी का सिक्का रख सके तो हमेशा रखा रहने दें।



- चावल को हल्दी लगाकर अपने पर्स में रखें।



- बैग में लाल रेशमी धागे से एक गांठ बांध कर रखें।



-बैग में शीशा और छोटा चाकु अवश्य रखें।



- पर्स में रुपये-पैसे जहां रखते हों वहां पर कौड़ी या गोमती चक्र रखें।



- चाबी को छल्ले में डाल कर रखें। यदि इस छल्ले में लाफिंग बुद्धा या अन्य कोई फेंगशुई का प्रतीक अच्छा रहता है।



- पर्स में किसी भी प्रकार का पिरामिड रखें। यह आपके लिए लाभदायक होगा।
Tuesday, October 25, 2011

लक्ष्मी के आसान मंत्र..

जगतजननी देवी के कल्याणकारी रूपों में दशमहाविद्या की साधना व पूजा सभी भौतिक व आध्यात्मिक सुख प्रदान करने वाली मानी गई है। इन दशमहाविद्याओं में ही एक है मां कमला। शास्त्रों के मुताबिक समुद्र मंथन से प्रकट हुई कमल पर विराजित देवी लक्ष्मी का यह स्वरूप धन, धान्य व ऐश्वर्य से पूर्ण कर दरिद्रता का अंत कर देती है।

दस विद्या की साधना में पावनता, संयम व अनुशासन का बड़ा महत्व है। लेकिन दीपावली के पांच दिनों की शुभ घड़ी में कमला लक्ष्मी का आसान मंत्रों से स्मरण मात्र भी श्री संपन्न और अर्थ कामना सिद्ध करने वाला बताया गया है।

दीपपर्व के हर दिन विशेष विधि-विधान से उपासना के बाद किसी लाल आसन पर बैठ इन 11 विशेष नामों का मन ही मन स्मरण कर अंत में लाल फूल और अक्षत चढ़ाकर देवी से सुख-समृद्ध जीवन की कामना करें-

ऊँ कमलायै नम:

ऊँ महामायायै नम:

ऊँ मंङ्गलायै नम:

ऊँ महाविष्णुप्रियंकर्यै नम:

ऊँ महाशक्त्यै नम:

ऊँ वरदायै नम:

ऊँ पूर्णायै नम:

ऊँ इन्दिरायै नम:

ऊँ गोविन्दवल्लभायै नम:

ऊँ मातंङ्गायै नम:

ऊँ वेदपूजितायै नम:

अपनी प्लानिंग किसी को न बताए

आज के दौर जैसे-जैसे आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है ठीक उसी तरह कार्यों में सफलता पाना उतना ही अधिक मुश्किल हो गया है। इसकी वजह यह है कि किसी भी व्यक्ति की आसपास के लोगों या अन्य लोगों से उसकी प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी अधिक बढ़ गया है। सभी चाहते है कि वे सबसे आगे रहे और इसके लिए वे कई प्रकार के प्रयास भी करते हैं। यदि आप भी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो यह मूल मंत्र अपनाएं।

सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक जरूरी है सुव्यवस्थित योजना। इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि योजना इतनी सटीक होना चाहिए कि किसी भी बिंदू पर उसके निष्फल होने की संभावनाएं कम से कम रहे। इसके अलावा यह बात सबसे अधिक ध्यान रखने योग्य है कि अपनी योजना क्या है यह किसी अन्य व्यक्ति पर भूलकर भी जाहिर नहीं होने देना चाहिए। बुद्धिमानी इसी में है कि अपनी योजनाओं का रहस्य बनाए रखें। चुपचाप अपना काम करते रहे और आपके प्रतिस्पर्धियों को बिल्कुल समझ नहीं आना चाहिए आपकी योजना क्या है?

आचार्य चाणक्य के अनुसार इस बात को व्यक्त मत होने दीजिये कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से अपनी योजना को रहस्य बनाए रखिए और लक्ष्य की ओर चुपचाप बढ़ते रहें। अपनी योजनाएं किसी ओर पर जाहिर होने के बाद वह आपके क्षति भी पंहुचा सकते हैं और लक्ष्य तक पहुंचने में आपके लिए मुश्किल अवश्य बढ़ जाएंगी। इस बात का सदैव ध्यान रखें।

ध्यान रखें इन 6 बातों का...

देवी-देवताओं की पूजा में आरती सबसे महत्वपूर्ण कर्म है। आरती के साथ ही पूजा-अर्चना पूर्ण होती है। पूजा में आरती के महत्व को देखते हुए दीपक तैयार करते समय कई सावधानियां रखनी अनिवार्य है। विधि-विधान से तैयार किए गए दीपक से देवी-देवताओं की कृपा जल्दी ही प्राप्त होती है-

- देवताओं को घी का दीपक अपनी बायीं ओर तथा तेल का दीपक दायीं ओर लगाना चाहिए।

- देवी-देवताओं को लगाया गया दीपक पूजन कार्य के बीच बुझना नहीं चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें।

- दीपक हमेशा भगवान के सामने ही लगाएं।

- घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती लगाएं।

- तेल के दीपक के लिए लाल बत्ती का उपयोग किया जाना चाहिए।

- दीपक कहीं से खंडित या टूटा नहीं होना चाहिए।
Tuesday, October 18, 2011

सुंदरकांड की चौपाई

हमारे व्यक्तित्व में जिस बात का रस भरा होगा, उसके छींटे हमसे मिलने वालों पर गिरेंगे ही। हनुमानजी तो भीतर से भक्ति रस से भरे हुए हैं, उनके रोम-रोम में राम हैं। इसी कारण जो उनसे मिलता है, उसे सान्निध्य सुख प्राप्त होता है।
उनकी मौजूदगी ही अपने आप में एक संरक्षण बन जाती है। सुंदरकांड में लंका प्रवेश पर हनुमानजी व लंकनी का वार्तालाप तुलसीदासजी ने बड़े गहन भाव के साथ लिखा है। वह हनुमानजी से हो रही अपनी इस वार्ता को सत्संग बताती है और आगे लंका प्रवेश के लिए हनुमानजी को एक विचार देती है।
इस विचार को तुलसीदासजी ने लंकनी जैसी राक्षसी के मुंह से कहलाया है-

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा।।

अयोध्या पुरी के राजा श्रीरघुनाथजी को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करते हुए सब काम कीजिए।
मानस की यह चौपाई अपने प्रभाव के कारण ही मंत्र हो गई। विपत्तियों को छोटी मान लेना ही उन पर विजय जैसा है। हनुमानजी के हृदय में तो श्रीराम पूर्व से थे ही, क्योंकि लंका के लिए उड़ते समय उनके लिए लिखा गया है-

यह कहि नाइ सबन्हि कहुं माथा। चलेउ हरषि हियं धरि रघुनाथा।।
उन्होंने दो काम किए थे- पहला श्रीराम हृदय में थे, दूसरा प्रसन्न थे। इसी कारण हनुमानजी की उपस्थिति मात्र से लंकनी के विचार भी दिव्य हो गए। हम अपनी भीतरी स्थिति को जितना पुनीत रखेंगे, बाहर का वातावरण उतना ही शुभ होगा।
Monday, October 17, 2011

Why worship Lakshmi on Diwali?

Hindus celebrate their festivals on the basis of the planetary positions of the Sun and the Moon. They are the most powerful planets which when placed favourably influence the person inconsiderably.

The Sun represents our soul and the Moon is capable of conferring great mental power.

Their auspicious presence and positioning create certain other combinations which confer favourable moments/hours to celebrate festivals.

One such esteemed festival is Diwali, the day when both Sun and Moon are placed in the same sign ie Libra, collaborating the most auspicious conjugation resulting in Amavasya, the night when the moon wanes off and total darkness sets in, calming down the frivolous mind which is totally governed by the moon. The more serene the mind becomes the more Shri Laxmi Pooja becomes intense and rewarding.

It is stated in Durgasaptshati that when the whole creation was engulfed in the shrouding darkness of Amvasaya, there emerged 18 armed Mahalxmi – the brilliant, glowing, luminous, divine light, enabling the whole evolutionary process to boom and develop.

Astrologically speaking, the planetary position plays an important role when the Diwali night falls in. The Sun and the Moon are placed in the same zodiac ie Libra, which is a zodiac for Surya – the Sun. The sign Libra belongs to Venus – planet known for bestowing wealth, riches, opulence and grandeur. The same is the case with goddess Laxmi – the deity of riches, prosperity, wealth and fortune. Such two combinations make the day auspicious to adore Laxmiji on Diwali night.

Secondly, the Sun – a panchamesh (the Lord of the fifth house) and the Moon – a chaturthesh (the Lord of the 4th house) when stationed in seventh house (whose sign Libra and the Lord is Venus) together forms an auspicious Yog called Laxmi Yog – the most opportune time for revering goddess Laxmi so that her blessings in the form of joy, prosperity, affluence, fertility, beauty, and enlightenment continuously be showered upon the devotees.

तीन संयोग और 24 घंटे का महामुहूर्त

20 अक्टूबर को गुरु पुष्य नक्षत्र है। गुरुवार का दिन होने के अलावा सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और गजकेसरी योग की वजह से इसका महत्व बढ़ गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शंकर व्यास के मुताबिक यह सुबह 6.35 से अगले दिन सुबह 6.33 तक रहेगा। यानी सभी कार्यो के लिए 24 घंटे का महामुहूर्त। इससे पहले यह नक्षत्र 2007 में था। अगली बार यह 2014 में आएगा।

धन, ज्ञान और बल के प्रतीक का दिन
राजस्थान ज्योतिष परिषद के महासचिव डॉ. विनोद शास्त्री बताते हैं कि इसी दिन भगवान श्रीराम का विवाह हुआ था। इसके अलावा गुरु पुष्य नक्षत्र को महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का संयोग भी माना जाता है। यानी धन, ज्ञान और बल के प्रतीक का दिन।

गुरु और शनि की वजह से खास है..

जालंधर के पं. सतपाल कहते हैं पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इसके देवता बृहस्पति हैं। लेकिन स्वामी शनि। बृहस्पति ज्ञान और नीति-निर्धारण में अग्रणी बनाते हैं। जबकि शनि स्थिरता लाते हैं। इस दिन जो कार्य किए जाते हैं, वे लंबे समय तक शुभ फल देते हैं।

बच्चों के लिए विशेष प्रभावशाली दिन

लुधियाना के ज्योतिष पं. मनोज शर्मा बताते हैं 20 अक्टूबर को अहोई अष्टमी भी है। इस दिन माताएं बच्चों की दीर्घायु और संपन्नता के लिए व्रत रखती हैं। गुरु पुत्र कारक होता है। यानी यह नक्षत्र बच्चों के लिए विशेष रूप से प्रभावी रहेगा। बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी चीजें खरीदना शुभ होगा।

चौघड़िए के मुताबिक खरीदारी का विशेष फल

ज्योतिषियों के मुताबिक चौघड़िए के मुताबिक खरीदारी हो तो विशेष फल मिलता है। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं और उन्हें सोना प्रिय होता है। इसलिए सोना खरीदना अधिक फलदायी है। साथ ही इस दिन जमीन खरीदना भी शुभदायी माना गया है।

कब क्या खरीदें

> सुबह 10.47 से दोपहर 12.12 बजे तक चर का चौघड़िया है। इस दौरान वाहन, यंत्र (मशीनरी), इलेक्ट्रॉनिक सामान व बही खातों की खरीदारी श्रेष्ठ रहेगी।

> दोपहर 12.12 से 3.01 बजे तक लाभ और अमृत के चौघड़िए में सभी प्रकार की वस्तुएं खरीदना शुभ होगा। खास कर बहीखाते, धातु, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं।

> शाम 4.27 से सूर्यास्त तक शुभ के चौघड़िए में जमीन-जायदाद की खरीदारी शुभ है।

> शुक्रवार को सुबह 10.47 बजे तक लाभ-अमृत में बर्तन, गहने, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी श्रेष्ठ रहेगी।
Thursday, October 13, 2011

Vaastu Shastra

According to Vaastu Shastra, a person's room should be set according to his/her age. Every room has a level of negative and positive energy which affects out personality.

There are certain rules inscribed in Vaastu Shastra to ensure the flow of positive energy in the room.

For kids:

- Light colours should be used in children's room. Walls and curtains should be light coloured. Cream and baby pink are apt for their room.

- The study table should be kept in north.

For bachelors:

- If you are having problems in getting married then make sure you never keep a green plant or bouquet in your room.

- Room in the south-west corner is the best for youth.

- Television, radio and computer should not be kept in the room.

For married couple:

- They should have a picture of lovers or love birds in the room.

- They should have light pink curtains in the bedroom.

- The walls should be painted either cream or light pink.

How to please Lord Hanuman?

Believed to be an avatar of Lord Shiva, Hanuman is worshiped as a symbol of physical strength, perseverance and devotion. It is believed that he can solve all your problems.

According to scriptures, Lord Hanuman’s blessings can make you successful. The people who seek success should worship Lord Hanuman every day. If anyone finds it difficult to worship everyday then he/she can do the puja on Tuesdays and Saturdays.

To get all your wishes fulfilled and get rid of all your problems then chant the following mantra along with vermillion, red sandalwood, akshat, flowers and sweets made of jaggery or black grams and jaggery, incense sticks and diya with jasmine oil or ghee made or cow’s milk.

You can chant the mantra 11, 21, 51 or 108 times with a rosary.

Ham hanumante rudratmakay hum fat

After this conduct aarti and apply vermillion on your forehead. Distribute the prasad to everyone.

तिरूपति बालाजी

तिरूपति बालाजी का मंदिर सबसे धनी मंदिरों में से एक है। यहां भक्तों द्वारा काफी धन, सोना-चांदी, हीरे-मोती आदि अर्पित किए जाते हैं। आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में धन और वैभव के प्रतीक भगवान विष्णु यानि श्री तिरूपति बालाजी का मंदिर स्थित है। ऐसा माना जाता है यहां साक्षात् भगवान श्रीहरि विराजमान हैं। यहां बालाजी की करीब 7 फीट ऊंची श्यामवर्ण की प्रतिमा स्थापित है।

तिरूपति बालाजी एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान को सबसे अधिक धन, सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात अर्पित किए जाते हैं। यहां दान करने की कोई सीमा नहीं है। भक्त यहां नि:स्वार्थ भाव से अपनी श्रद्धा के अनुसार धन अर्पित करते हैं। यह धन चढ़ाने के संबंध में एक कथा बहुप्रचलित है।

कथा के अनुसार एक बार सभी ऋषियों में यह बहस शुरू हुई कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सबसे बड़ा देवता कौन हैं? त्रिदेव की परिक्षा के लिए ऋषि भृगु को नियुक्त किया गया। इस कार्य के लिए भृगु ऋषि भी तैयार हो गए। ऋषि सबसे पहले ब्रह्मा के समक्ष पहुंचे और उन्होंने परमपिता को प्रणाम तक नहीं करा, इस पर ब्रह्माजी भृगु ऋषि पर क्रोधित हो गए।

अब ऋषि शिवजी की परीक्षा लेने पहुंचे। कैलाश पहुंचकर भृगु बिना महादेव की आज्ञा के उनके सामने उपस्थित हो गए और शिव-पार्वती का अनादर कर दिया। इससे शिवजी अतिक्रोधित हो गए और भृगु ऋषि का अपमान कर दिया।

अंत में ऋषि भुगु भगवान विष्णु के सामने क्रोधित अवस्था में पहुंचे और श्रीहरि की छाती पर लात मार दी। इस भगवान विष्णु ने विनम्रता से पूर्वक पूछा कि मेरी छाती व्रज की तरह कठोर है अत: आपके पैर को चोट तो नहीं लगी? यह सुनकर भृगु ऋषि समझ गए कि श्रीहरि ही सबसे बड़े देवता यही है।

यह सब माता लक्ष्मी देख रही थीं और वे अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकी और विष्णु को छोड़कर दूर चले गईं और तपस्या में बैठ गई। लंबे समय के बाद देवी लक्ष्मी ने शरीर त्याग दिया और पुन: एक दरिद्र ब्राह्मण के यहां जन्म लिया। जब विष्णु को यह ज्ञात हुआ तो वे माता लक्ष्मी से विवाह करने पहुंचे परंतु देवी लक्ष्मी के गरीब पिता ने विवाह के लिए विष्णु से काफी धन मांगा। लक्ष्मी के जाने के बाद विष्णु के पास इतना धन नहीं था। तब देवी लक्ष्मी से विवाह के लिए उन्होंने देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेरदेव से धन उधार लिया। इस उधार लिए धन की वजह से विष्णु-लक्ष्मी का पुन: विवाह हो सका। कुबेर देव धन चुकाने के संबंध में यह शर्त रख दी कि जब तक मेरा कर्ज नहीं उतर जाता आप माता लक्ष्मी के साथ केरल में रहेंगे। बस तभी से तिरूपति अर्थात् भगवान विष्णु वहां विराजित हैं।

कुबेर से लिए गए उधार धन को उतारने के लिए भगवान के भक्तों द्वारा तिरूपति में धन चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह कुबेर देव को प्राप्त होता है और भगवान विष्णु का कर्ज कम होता है।

सरस्वती मंत्र

शास्त्र कहते हैं कि लक्ष्मी का वास वहां होता है, जहां सम्पतियां रहती है। यहां सम्पत्तियों का अर्थ मात्र धन-दौलत, भूमि, मकान से ही नहीं बल्कि उन गुण, कलाओं और विद्या से भी है, जिनके द्वारा आचरण व विचार पवित्र होते हैं।
विद्या, ज्ञान, कला, बुद्धि रूपी ऐसी ही संपत्तियों से समृद्ध करने वाली देवी के रूप में माता सरस्वती पूजनीय है। यही कारण है कि दीपावली पर भी महालक्ष्मी के साथ महासरस्वी पूजा भी शुभ मानी गई है। संदेश यही है कि विद्या और ज्ञान में दक्षता से लक्ष्मी कृपा यानी धन, वैभव, यश भी प्राप्त होने लगता है।
दीपावली के अलावा देवी सरस्वती की शुक्रवार या पंचमी तिथि पर उपासना भी शुभ मानी जाती है। किंतु यश व सफलता की कामना से देवी का एक विशेष मंत्र इन सभी घडिय़ों के साथ हर रोज देवी सरस्वती की पंचोपचार पूजा या धूप, दीप लगाकर भी स्मरण किया जाए तो मनोरथ पूरे करने वाला माना गया है।
- सुबह स्नान के बाद देवी सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर की पंचोपचार पूजा में सफेद या केसिरया चंदन, अक्षत, पीले या सफेद फूल व दूध या मिठाई का भोग लगाकर नीचे लिखे सरल सरस्वती मंत्र का स्मरण कम से कम 108 बार स्फटिक या चंदन की माला या मन ही मन करें -
ऊँ सौं सरस्वत्यै नम:
या
ऊँ ह्रीं सरस्वत्यै नम:
- मंत्र स्मरण के साथ या बाद में धूप व दीप द्वारा देवी सरस्वती की आरती कर सद्बुद्धि और समृद्धि की कामना करें।
Wednesday, October 12, 2011

धन प्राप्ति के लिए यह टोटका

तंत्र शास्त्र के अंतर्गत धन प्राप्ति के टोने-टोटकों के लिए कुछ विशेष मुहूर्त बताए गए हैं जैसे-दीपावली, धनतेरस व अक्षय तृतीया आदि। इस समय किए गए टोने-टोटके विशेष लाभ देते हैं। इस बार दीपावली का त्योहार 26 अक्टूबर को है। टोने-टोटके के लिए यह विशेष समय है। धन प्राप्ति के लिए इस दिन यह टोटका करें-

टोटका

दीपावली की रात को साधक लाल लंगोट पहनकर, लाल आसन पर खड़ा होकर, सिंदूर का तिलक लगाकर लक्ष्मी यंत्र को अपनी बाईं हथेली में ले और दाएं हाथ में कमल गट्टे या स्फटिक की माला लेकर नीचे लिखे मंत्र का 21 माला जप करें।

मंत्र

अघोर लक्ष्मी मम गृहे आगच्छ स्थापय तुष्टय पूर्णत्व देहि देहि फट्



इस प्रकार पूरे विधि-विधान से यदि मंत्र का जप करें तो शीघ्र ही व्यक्ति धनवान हो जाता है। इसमें कोई शंका नहीं है।
Monday, October 10, 2011

नोटों से पर्स भरा रखना हो तो ये चीजें तुरंत हटा दे, क्योंकि

रुपए या नोटों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने का कार्य हमारे पर्स बखूबी निभाते हें। हर परिस्थिति में आपके नोट पर्स में सही ढंग से रखे रहते हैं। जिससे उनके कटने या फटने का डर नहीं रहता। पर्स में पैसा रखा जाता है अत: इस संबंध में वास्तु द्वारा कई महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैं। जिन्हें अपनाने पर व्यक्ति को भी धन की कमी का एहसास ही नहीं होता है।

हमारे जीवन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों का संबंध वास्तु से है। वास्तु शास्त्र हमारे आसपास फैली सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांतों पर कार्य करता है। जो वस्तु नकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं उन्हें हमारे आसपास से हटा देना चाहिए। क्योंकि इनसे हमारे सुख और कमाई पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आय बढ़ाने या फिजूल खर्चों में कमी करने के लिए पर्स का वास्तु भी ठीक करने की आवश्यकता होती है। पर्स में सिक्के और नोट दोनों को ही अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। इसके अलावा पर्स में मृत व्यक्तियों के चित्र रखना भी शुभ नहीं माना जाता है। अत: इस प्रकार के चित्रों को भी पर्स में नोटों के साथ नहीं रखें। पर्स में संत-महात्मा के चित्र रखे जा सकते हैं। यदि कोई संत या महात्मा देह त्याग चुके हैं तब भी उनके चित्र या फोटो पर्स रखे जा सकते हैं क्योंकि शास्त्रों के अनुसार देह त्यागने के बाद भी संत-महात्माओं को मृत नहीं माना जाता है। कुछ लोग पर्स में ही चाबियां भी रखते हैं, चाबियां रखना भी अशुभ ही माना जाता है। इन्हें भी रुपए-पैसों से अलग ही रखना शुभ रहता है। पर्स में नोट या सिक्कों के साथ खाने की चीजें भी नहीं रखना चाहिए।

वास्तु के अनुसार पर्स में ऐसे वस्तुएं हरगिज न रखें जो नकारात्मक ऊर्जा को संचारित करती हैं। पर्स में किसी भी प्रकार के बिल या भुगतान से संबंधित कागज नहीं रखने चाहिए। इसके लिए पर्स में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु भी न रखें। जो वस्तुएं फिजूल हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है उन वस्तुएं तुरंत ही पर्स से बाहर कर दें। इनके अतिरिक्त पर्स में धार्मिक और पवित्र वस्तुएं रखें, जिनसे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जिन्हें देखकर हमारा मन प्रसन्न होता है।