About Me

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हर जगह ये पूछा जाता है कि अपने बारे मे बताइए (About me), हम ये सोचते है की जो हमें जानते है उन्हें अपने बारे मे बताना ग़लत होगा क्योंकि वो हमें जानते है और जो हमें नही जानते उन्हे हम बता कर क्या करेंगे की हम कौन है | जो हमें नही जानता क्या वो वाकई हमें जानना चाहता है और अगर जानना चाहता है तो उसे About me से हम क्या बताये क्योंकि हम समझते है बातचीत और मिलते रहने से आप एक दूसरे को बेहतर समझ सकते हो About Me से नही | वैसे एक बात और है हम अपने बारे मे बता भी नही सकते है क्योंकि हमें खुद नही पता की हम क्या है ? हम आज भी अपने आप की तलाश कर रहे है और आज तक ये नही जान पायें हैं की हम क्या है? अब तक का जीवन तो ये जानने मे ही बीत गया है की हमारे आस पास कौन अपना है और कौन पराया ? ये जीवन एक प्रश्न सा ज़रूर लगता है और इस प्रश्न को सुलझाने मे हम कभी ये नही सोच पाते है की हम कौन है? कुछ बातें सीखने को भी मिली जैसे आपका वजूद आपके स्वभाव या चरित्र से नही बल्कि आपके पास कितने पैसे है उससे निर्धारित होता है | कुछ लोग मिले जो कहते थे की वो रिश्तों को ज़्यादा अहमियत देते है लेकिन अंतत: ... बहुत कुछ है मन मे लिखने के लिए लेकिन कुछ बातें या यू कहें कुछ यादें आ जाती है और मन खट्टा कर जाती है तो कुछ लिख नही पाते हैं |

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Friday, June 27, 2014

गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में हर दिन देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में विविध प्रकार की पूजा से माता को प्रसन्न किया जाता है। गुप्त नवरात्रि में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। 
शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा से लेकर नौ तिथियों में देवी को विशिष्ट भोग अर्पित करने तथा ये भोग गरीबों को दान करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जानिए किस तिथि पर देवी को किस चीज का भोग लगाना चाहिए:
प्रतिपदा यानी गुप्त नवरात्रि के पहले दिन माता को घी का भोग लगाएं तथा उसका दान करें। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा वह निरोगी होता है।
द्वितीया तिथि को माता को शक्कर का भोग लगाएं तथा उसका दान करें। इससे साधक को दीर्घायु प्राप्त होती है।
तृतीया तिथि को माता को दूध चढ़ाएं तथा इसका दान करें। ऐसा करने से सभी प्रकार के दु:खों से मुक्ति मिलती है।
चतुर्थी तिथि को मालपूआ चढ़ाकर दान करें। इससे सभी प्रकार की समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
पंचमी तिथि को माता दुर्गा को केले का भोग लगाएं  व गरीबों को केले का दान करें। इससे आपके परिवार में सुख-शांति रहेगी।
षष्ठी तिथि के दिन माता दुर्गा को शहद का भोग लगाएं व इसका दान भी करें। ये गरीब भी मालामाल हो जाता है।
सप्तमी तिथि को माता को गुड़ की वस्तुओं का भोग लगाएं तथा दान भी करें। इससे दरिद्रता का नाश होता है।
अष्टमी तिथि को नारियल का भोग लगाएं तथा नारियल का दान भी करें। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
नवमी तिथि को माता को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग लगाएं व यथाशक्ति गरीबों में दान करें। इससे लोक-परलोक में आनंद व वैभव मिलता है।
Thursday, January 17, 2013

लक्ष्मी दौड़ी चली आएगी आपके घर, ध्यान रखें बस ये 2 बातें

हर कोई यही चाहता है कि धन की देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद उस पर बना रहे। इसके लिए वह पूरे विधि-विधान से भगवान को मनाने में जुटा रहता है तो कभी दान-धर्म कर पुण्य कमाता है मगर कम ही लोग ये जानते हैं कि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजन स्थान पर उचित रोशनी का होना भी बहुत जरुरी है। ये भी वास्तु का एक नियम है, जिससे माता लक्ष्मी शीघ्र ही अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाती है।
वास्तु के अनुसार घर में पूजन स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि घर की सुख-समृद्धि और धन के आवागमन पर इसका सीधा असर पड़ता है। वास्तु के अनुसार पूजा घर ईशान कोण में ही बनाया जाना चाहिए क्योंकि यही स्थान देवताओं के लिए निश्चित किया गया है। पूजा घर में पीले रंग के बल्व का उपयोग करना शुभ होता है तथा शेष कक्ष में दूधिया बल्व का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और व्यापार-व्यवसाय में तरक्की होती है।
वास्तु के अनुसार शाम के समय पूजन स्थान पर इष्ट देव के सामने प्रकाश का उचित प्रबंध होना चाहिए, इसके लिए घी का दीया जलाना अत्यंत उत्तम है। शास्त्रों के अनुसार इस समय घर में धन की देवी लक्ष्मी का प्रवेश होता है। यदि इस समय घर में अंधेरा होता है तो लक्ष्मी अपना मार्ग बदल लेती है और बाहर की नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर जाती है। ऐसी अशुभ ऊर्जा को रोकने तथा घर में लक्ष्मी के वास के लिए गोधूलि बेला के समय घर में तथा पूजा स्थान पर उत्तम रोशनी होनी चाहिए।

पति-पत्नी की दूरियां कम करते हैं ये SECRET आयुर्वेदिक नुस्खे

वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण वैवाहिक जीवन औपचारिकता भर रह गया है। इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट युगलों की संख्या में इजाफा हो रहा है, परिणाम झगड़े, तनाव अन्य कई तरह की शारीरिक व मानसिक व्याधियां। ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है तो आइए जानते हैं घर पर बनी कुछ ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में जो आपका वैवाहिक जीवन खुशियों से भर देंगी...
- असगंध, विधारा, शतावर, सफेद मूसली, तालमखाना के बीज, कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर दरदरा कर कपड़े से छान लें तथा 350 ग्राम मिश्री मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठंडे दूध से लें। लगातार एक माह तक लेने से यौन सामथ्र्य में वृद्धि अवश्य होगी।
- कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए कौंचबीज चूर्ण, सफेद मूसली, तालमखाना, अश्वगंध चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10-10 ग्राम की मात्रा में ठंडे दूध से सेवन करें, निश्चित लाभ मिलेगा।
- शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर, बबूलफली  बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक करें। इससे शीघ्रपतन में लाभ मिलता है।
- शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठंडे दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है।
Friday, October 19, 2012

नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र


नवरात्रि के नौ दिनों में सभी चाहते हैं कि माता की कृपा उन्हें प्राप्त हो। इसके लिए हर भक्ति अपने तरीके से माता की आराधना करता है। दरअसल नवरात्रि सिर्फ एक पर्व ही नहीं बल्कि इसमें जीवन प्रबंधन से जुड़े कई सूत्र भी छिपे हैं। आवश्यकता है तो बस उन्हें समझने की। नवरात्रि के शुभ अवसर पर हम आपके लिए लाएं हैं नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र। इसके माध्यम से आप अपने जीवन की परेशानियों व सवालों का हल आसानी से पा सकते हैं। यह बहुत ही चमत्कारी चक्र है।

उपयोग विधि
जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना है वो पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करने के बाद 1 बार इस मंत्र का जप करें-
या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
इसके बाद आंखें बंद करके अपना सवाल पूछें और माता दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर कर्सर घुमाते हुए रोक दें। जिस कोष्ठक (खाने) पर कर्सर रुके, उस कोष्ठक में लिखे अंक के फलादेश को ही अपने अपने प्रश्न का उत्तर समझें।
1- धन लाभ होगा एवं मान-सम्मान भी मिलेगा।
2- धन हानि अथवा अन्य प्रकार का अनिष्ट होने की आशंका है।
3- अभिन्न मित्र अथवा प्रिय से मिलन होगा, जिससे मन प्रफुल्लित होगा।
4- कोई व्याधि अथवा रोग होने की आशंका है, अत: कार्य अभी टाल देना ही श्रेयस्कर रहेगा।
5- जो भी कार्य आपने सोचा है, उसमें आपको सफलता मिलेगी, निश्चिंत रहें।
6- कुछ दिन कार्य टाल दें। इसमें किसी से कलह अथवा कहासुनी हो सकती है, जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। 
7- आपका अच्छा समय शुरु हो गया है। शीघ्र ही सुंदर एवं स्वस्थ पुत्र होने के योग हैं। इसके अतिरिक्त आपकी अन्य मनोकामनाएं भी पूर्ण होंगी। 
8- विचार पूरी तरह त्याग दें। इस कार्य में मृत्यु तुल्य कष्ट की आशंका है। यहां तक कि मृत्यु भय भी है। 
9- समाज अथवा सरकार की दृष्टि में सम्मान बढ़ेगा। आपका सोचा हुआ कार्य अच्छा है। 
10- आपको अपेक्षित लाभ प्राप्त होगा, अत: कार्यारंभ कर सकते हैं।
11- आप जिस कार्य के बारे में सोच रहे हैं, उसमें हानि की आशंका है। 
12- आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। पुत्र से भी आपको विशेष लाभ मिलेगा। 
13- शनिदेव की उपासना करें, कार्य में आ रही बाधाएं दूर होंगी। 
14- आपका अच्छा समय शुरु हो गया है। चिंताएं मिटेंगी, सुख-संपत्ति प्राप्त होगी। 
15- आर्थिक तंगी के कारण ही आपके घर में सुख-शांति नहीं है। एक माह बाद स्थितियां बदलने लगेंगी, धैर्य एवं संयम रखें।
Saturday, September 15, 2012

जेब व तिजोरी में होगा मनचाहा पैसा

देवी लक्ष्मी अभावों का अंत करती है। जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार भी भावों से ही नियत होते हैं। जहां बुरी सोच नारकीय जीवन की ओर ले जाती है, तो अच्छी भावना या विचार अभावों का नाश कर वैभवशाली बनाते हैं। 
भाव और वैभव द्वारा जीवन में अभावों की खाई भरने के लिए ही देवी लक्ष्मी का स्वरूप वैभव लक्ष्मी का स्मरण शुभ माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक देवी उपासना के किसी भी विशेष दिन जैसे अमावस्या, शुक्रवार, नवमी या नवरात्रि  की रात्रि में विशेष मंत्र से लक्ष्मी का ध्यान मनचाहे आनंद व समृद्धि देता है। 
फिर आज तो विष्णु भक्ति के विशेष काल अधिकमास के साथ अमावस्या का ही संयोग है। इसलिए जानिए वैभव लक्ष्मी की उपासना का आसान उपाय और मंत्र विशेष - 
- माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र की पूजा में खासतौर पर लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें। दूध के पकवानों या खीर का भोग लगाएं। 
- पूजा के बाद समृद्धि व शांति की इच्छा से इस वैभव लक्ष्मी मंत्र का यथाशक्ति जप करें -  
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी। 
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥ 
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी। 
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
- इस मंत्र जप के बाद माता लक्ष्मी की गोघृत दीप से आरती करें।
- माता लक्ष्मी से क्षमा प्रार्थना करें व हर अभाव का दूर करने की कामना करें। प्रसाद ग्रहण कर घर के द्वार पर एक दीप लगाएं।